डिजिटल सबूत न्यूज़ | विशेष खोजी रिपोर्ट | कासगंज, 23 अक्टूबर 2026
डिजिटल सबूत न्यूज़ के पास उपलब्ध ई-ग्राम स्वराज की ऑनलाइन भुगतान रिपोर्ट में पटियाली विकासखंड से जुड़े कुल ₹62.04 करोड़ के भुगतान की स्वीकृत प्रविष्टियाँ दर्ज हैं। समाचार कक्ष के अनुसार, यह भुगतान हो चुके लेनदेन का विवरण है। छह वित्तीय वर्षों की इस रिपोर्ट में 2021–22 से 2025–26 तक के पाँच पूर्ण वर्षों की ₹58.02 करोड़ तथा 2026–27 की 23 अक्टूबर तक की आंशिक अवधि की ₹4.01 करोड़ राशि शामिल है। मूल पोर्टल की सारणी में भुगतान की स्वीकृति दर्ज है, जबकि बैंक में सफल जमा की अलग स्थिति इस समेकित रिपोर्ट में नहीं दी गई है। इसलिए इसे फंड आवंटन या अभी तक भुगतान के लिए लंबित राशि बताना उचित नहीं है; सभी लेनदेन के बैंक-स्तरीय निस्तारण की स्वतंत्र पुष्टि भी इस एक रिपोर्ट से नहीं की जा सकती।
इसी बीच पटियाली के खंड विकास अधिकारी संजीव कुमार से जोड़े जा रहे करीब 53 सेकंड के वीडियो में कथित कमीशन के बँटवारे, वरिष्ठ प्रशासनिक पदों तक हिस्सा पहुँचाने और जेल भेजने की चेतावनी जैसी बातें चर्चा में हैं। डिजिटल सबूत न्यूज़ ने वीडियो की उपलब्ध प्रति और eGramSwaraj के अभिलेखों की अलग-अलग पड़ताल की है। किसी विशेष स्वीकृत भुगतान का कथित कमीशन से सीधा संबंध अभी प्रमाणित नहीं है।
अब प्रश्न जाँच की निष्पक्षता का भी है। जिस कथित बातचीत में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों का उल्लेख हुआ है, उससे संबंधित जाँच की निगरानी यदि उन्हीं कार्यालयों में हो, तो हितों के संभावित टकराव से कैसे बचा जाएगा? निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र अधिकारी या उपयुक्त उच्चस्तरीय व्यवस्था क्यों नहीं अपनाई जाए? यह सवाल जाँच की प्रक्रिया को लेकर है, आरोपित किसी अधिकारी के दोषी सिद्ध हो जाने का निष्कर्ष नहीं।
ई-ग्राम स्वराज के भुगतान रिकॉर्ड में क्या दर्ज है?
डिजिटल सबूत न्यूज़ को उपलब्ध ई-ग्राम स्वराज के ऑनलाइन भुगतान विवरणों में कासगंज जिले के सात विकासखंड अलग-अलग दर्ज हैं। इनमें पटियाली के आँकड़े प्रत्येक वर्ष की मूल पंक्ति से मिलाए गए। 2021–22 से 2025–26 के पाँच पूर्ण वर्षों में ₹58,02,32,495.50 की 19,602 भुगतान-स्वीकृतियाँ तथा 2026–27 की उपलब्ध आंशिक अवधि में ₹4,01,46,416 की 1,399 भुगतान-स्वीकृतियाँ दर्ज हैं। इस प्रकार प्राप्त रिपोर्ट में कुल ₹62,03,78,911.50 की 21,001 प्रविष्टियाँ दिखाई देती हैं। समाचार कक्ष ने इन प्रविष्टियों को किए जा चुके भुगतान का रिकॉर्ड बताया है; मूल रिपोर्ट का घोषित शीर्षक ‘कुल स्वीकृत भुगतान’ है।
इन अभिलेखों में किसी अधिकारी द्वारा रकम वसूलने, हस्तगत करने या उसका बँटवारा करने का विवरण नहीं है। उपलब्ध आँकड़ों के मूल पोर्टल और वास्तविक बैंक-लेनदेन से स्वतंत्र मिलान की आवश्यकता बनी हुई है।
ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड पर 10 प्रतिशत का गणित—आरोपों का प्रमाण नहीं
नीचे 10%, 4% और 5% की तीन अलग-अलग काल्पनिक गणनाएँ हैं। ये वास्तविक कमीशन, अवैध भुगतान अथवा किसी अधिकारी की व्यक्तिगत कमाई नहीं हैं। किसी विशेष दर को सभी भुगतानों पर लागू करने का कोई साक्ष्य इन फ़ाइलों में नहीं मिलता।
| वित्तीय वर्ष | स्वीकृत भुगतान संख्या | स्वीकृत राशि (₹ करोड़) | 10% गणितीय राशि (₹ करोड़) | 4% गणितीय राशि (₹ करोड़) | 5% गणितीय राशि (₹ करोड़) |
|---|---|---|---|---|---|
| 2021–22 | 2,797 | 10.36 | 1.04 | 0.41 | 0.52 |
| 2022–23 | 2,650 | 9.54 | 0.95 | 0.38 | 0.48 |
| 2023–24 | 3,637 | 10.09 | 1.01 | 0.40 | 0.50 |
| 2024–25 | 5,990 | 16.07 | 1.61 | 0.64 | 0.80 |
| 2025–26 | 4,528 | 11.96 | 1.20 | 0.48 | 0.60 |
| पाँच पूर्ण वर्षों का योग | 19,602 | 58.02 | 5.80 | 2.32 | 2.90 |
| 2026–27 (23 अक्टूबर तक) | 1,399 | 4.01 | 0.40 | 0.16 | 0.20 |
| छह रिपोर्टों का योग | 21,001 | 62.04 | 6.20 | 2.48 | 3.10 |
राशियाँ ₹ करोड़ में दो दशमलव तक पूर्णांकित हैं। वास्तविक मूल राशि और सूत्रों का वर्षवार मिलान तैयार स्रोत-ऑडिट कार्यपत्रक में सुरक्षित है। 2026–27 की अवधि आंशिक होने के कारण उसे पूरे वित्तीय वर्ष की तरह नहीं आँकना चाहिए।
“मुझे पाँच बचता है”—क्या ₹2.90 करोड़ किसी बीडीओ के हिस्से का प्रमाण है?
नहीं। वीडियो में 10 प्रतिशत, चार प्रतिशत और “मुझे पाँच बचता है” जैसे कथन सुनाई देने का दावा है। यदि पाँच पूर्ण वर्षों की हर स्वीकृत भुगतान राशि पर महज कल्पना के तौर पर 10% लगाया जाए, तो ₹5.80 करोड़ बनते हैं; 4% पर ₹2.32 करोड़ और 5% पर ₹2.90 करोड़। आंशिक 2026–27 सहित छह रिपोर्टों पर वही काल्पनिक गणना क्रमशः ₹6.20 करोड़, ₹2.48 करोड़ और ₹3.10 करोड़ बनती है। ये परिदृश्य एक-दूसरे में जोड़ने योग्य, प्रमाणित बँटवारा नहीं हैं।
वीडियो के संवाद में ‘तीन प्रतिशत’ और ‘चार प्रतिशत’ का उल्लेख है। हालाँकि ‘पाँच’ किस राशि या हिस्से के संदर्भ में कहा गया, यह स्पष्ट नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण, इन छह फ़ाइलों में संजीव कुमार का पदस्थापन आदेश या कार्यभार अवधि नहीं है। पुराने वित्तीय वर्षों के सभी स्वीकृत भुगतानों को उनके कार्यकाल में हुआ या उनके व्यक्तिगत नियंत्रण में था बताना अभिलेख-विरुद्ध अनुमान होगा। इस कारण ₹5.80 करोड़ अथवा ₹2.90 करोड़ किसी अधिकारी की प्राप्त रिश्वत, संपत्ति या कमीशन साबित नहीं करते।
2024–25 में स्वीकृत भुगतानों में वृद्धि, फिर गिरावट—पर इसका अर्थ क्या?
2023–24 में पटियाली की रिपोर्ट में लगभग ₹10.09 करोड़ की स्वीकृत भुगतान राशि और 3,637 प्रविष्टियाँ थीं। अगले वित्तीय वर्ष 2024–25 में यह बढ़कर लगभग ₹16.07 करोड़ और 5,990 प्रविष्टियाँ हो गईं। रकम में वृद्धि लगभग 59.28% थी। 2025–26 में रकम घटकर ₹11.96 करोड़ रह गई। वृद्धि या कमी भ्रष्टाचार का संकेत होने का अपने आप प्रमाण नहीं है: योजनाओं, कार्यों, स्वीकृतियों, वित्तीय आवंटनों या भुगतान चरणों में बदलाव जैसे कारणों का परीक्षण जरूरी है। वर्तमान 2026–27 की आंशिक अवधि की सीधे पूरे 2025–26 से तुलना भ्रामक होगी।
भुगतान का अंतिम मिलान कैसे होगा?
ई-ग्राम स्वराज की भुगतान प्रणाली में स्वीकृति, पीएफएमएस के माध्यम से भुगतान-फाइल का प्रसंस्करण और बैंक से प्राप्त अंतिम स्थिति अलग-अलग चरण हैं। समाचार कक्ष के अनुसार रिपोर्ट में शामिल भुगतान किए जा चुके हैं, लेकिन साझा विकासखंडवार सारांश केवल स्वीकृत भुगतान की संख्या और रकम दिखाता है। प्रत्येक लेनदेन के सफल निस्तारण का स्वतंत्र मिलान संबंधित पीएफएमएस स्थिति, भुगतान आदेश और बैंक अभिलेखों से किया जा सकता है। इन भुगतानों में कथित कमीशन की वास्तविक रकम जानने के लिए भी अलग साक्ष्य आवश्यक हैं।
इस पड़ताल को आगे ले जाने के लिए ग्राम पंचायत एवं योजना-वार भुगतान-विवरण, वाउचर और कार्यादेश, संबंधित बिल/जीएसटी अभिलेख जहाँ लागू हों, स्वीकृति तथा डिजिटल हस्ताक्षर लॉग, PFMS/FTO की वास्तविक सफलता/विफलता स्थिति, बैंक समन्वय, संबंधित अधिकारियों के पदस्थापन आदेश, मूल वीडियो और दर्ज शिकायत/जाँच-आदेश की प्रमाणित प्रतियाँ महत्वपूर्ण होंगी। इनमें से किसी रिकॉर्ड में अवैध भुगतान दर्ज होने का दावा अभी नहीं है।
जाँच का अभिलेखीय आधार: डिजिटल सबूत न्यूज़ के पास उपलब्ध ई-ग्राम स्वराज से प्राप्त छह विकासखंडवार ऑनलाइन भुगतान रिपोर्टें। प्रत्येक वर्ष में ‘पटियाली’ की पंक्ति तथा ‘भुगतान स्वीकृत’ की संख्या और राशि का मिलान किया गया। रिपोर्टें 23 अक्टूबर 2026 को तैयार हुई थीं; 2026–27 की अवधि 1 अप्रैल से 23 अक्टूबर तक है। साझा सारांश में योजना-वार भुगतान, बैंक-निस्तारण की स्थिति और व्यक्तिगत लाभार्थियों का विवरण नहीं है।
वीडियो की मूल क्रमवार पड़ताल: 00:00 से 00:53 तक
वायरल वीडियो के प्रमुख अंश क्रमवार प्रस्तुत हैं।
00:00–00:07 | कथित कमीशन का हिसाब: दस, तीन, चार और पाँच
वीडियो से संबंधित Digital Saboot News की तैयार स्क्रिप्ट के आरंभ में सवाल दर्ज है—“मिलता है कितना?” जवाब है—“दस।” इसके बाद कथित वक्ता कहता है—“दस में तीन परसेंट… चार परसेंट बाँट के आता हूँ। मुझे पाँच बचता है।”
कथित संवाद में ‘दस’, ‘तीन प्रतिशत’, ‘चार प्रतिशत’ और ‘पाँच’ का उल्लेख जाँच योग्य है। ये किस कार्य, भुगतान या रकम के संदर्भ में कहे गए, इसकी पुष्टि संबंधित दस्तावेज और बातचीत में शामिल पक्षों के बयान से होनी चाहिए। केवल इस कथन से कोई निश्चित अवैध वसूली प्रमाणित नहीं होती।
00:07–00:15 | “सिस्टम बना हुआ है”—अफसरों को हिस्सा देने का कथित दावा
स्क्रिप्ट के दूसरे हिस्से में कथित तौर पर कहा गया है—“मैं चाहता हूँ मैं भी नहीं लूँ। सिस्टम बना हुआ है।” इसके बाद डीडीओ, पीडी, डीएम और सीडीओ जैसे पदों का क्रमवार उल्लेख करते हुए “चारों को देता हूँ तब तो लेके आता हूँ” जैसी पंक्ति दर्ज है।
यह आरोप सबसे गंभीर है, क्योंकि इसमें कथित रकम को वरिष्ठ प्रशासनिक पदों से जोड़ा गया है। लेकिन किसी व्यक्ति द्वारा इन पदों का नाम लेना उन पर तैनात अधिकारियों के रकम लेने का प्रमाण नहीं है। जाँच का असली विषय कथित भुगतान का स्रोत, संबंधित कार्य, तारीख, भुगतान माध्यम, स्वतंत्र गवाह और अभिलेखीय साक्ष्य होना चाहिए।
00:15–00:18: अंतिम स्क्रिप्ट में इस हिस्से का स्पष्ट संवाद दर्ज नहीं है। इसे अपनी ओर से भरकर किसी कथन का हिस्सा नहीं बनाया गया है।
00:18–00:39 | “लेना सीखे हो, देना नहीं सीखे”; फिर मेज़ पर रखे कागज़
00:18–00:23: कथित वक्ता की ओर से “लेना सीखे हो, देना नहीं सीखे” जैसी टिप्पणी दर्ज है। यह किस व्यक्ति और किस लेन-देन के संदर्भ में कही गई थी, अभी अज्ञात है।
00:24–00:39: इसके बाद उपलब्ध वीडियो के दृश्य-विवरण में मेज़ पर रखी फाइल या रजिस्टर जैसे कागज़ों के पन्ने देखते और पलटते हुए व्यक्ति का उल्लेख है। इस अवधि का पूर्ण संवाद तैयार स्क्रिप्ट में नहीं है। कागज़ किस योजना, कार्यालय या भुगतान के थे, यह पढ़े जा सकने वाले मूल अभिलेखों से ही तय होगा। उन्हें बिना प्रमाण कथित उगाही का हिसाब बताना सही नहीं होगा।
00:40–00:43 | दूसरे व्यक्ति का जवाब, फिर “पूरा एक दे जाना”
00:40–00:41: सामने उपस्थित दूसरे व्यक्ति के शब्द दर्ज हैं—“ठीक है सर।”
00:41–00:43: इसके तुरंत बाद कथित वक्ता कहता है—“पूरा एक दे जाना। एक से कम मत देना।” यह बातचीत किस काम या धनराशि को लेकर थी, इसका कोई निश्चित वित्तीय आधार अभी सामने नहीं है। ‘एक’ को एक लाख रुपये, एक प्रतिशत या अन्य रकम मानना केवल अनुमान होगा। भुगतान से जुड़े वाउचर, कार्यादेश और संबंधित व्यक्तियों के बयान मिलने पर ही आशय स्पष्ट हो सकेगा।
00:44–00:53 | “नेतागिरी करना मत”; अंत में जेल भेजने की कथित चेतावनी
00:44–00:48: स्क्रिप्ट में अगला कथन है—“नोट कर लेना। और नेतागिरी करना मत किसी से। बैठ के तुम बहुत मंत्रणा करते हो।”
00:48–00:53: अंत में “सुनो, जो मंत्रणा करते हैं वो जेल जाएंगे” जैसी चेतावनी दर्ज है। इसके बाद अशोभनीय शब्दों और किसी व्यक्ति की फाइल रखे होने का कथित उल्लेख आता है।
यहाँ पड़ताल का विषय है कि क्या किसी शिकायत, विरोध या भुगतान को लेकर दबाव बनाने का प्रयास हुआ। किसी की ‘फाइल’ होने का कथन मात्र वास्तविक जाँच, मुकदमे या जेल भेजने की वैधानिक प्रक्रिया शुरू होने का प्रमाण नहीं है।
जिन पदों का कथित उल्लेख, क्या उन्हीं के प्रशासनिक नियंत्रण में जाँच होगी?
कथित वीडियो के प्रतिलेखन में जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी और परियोजना निदेशक जैसे पदों का नाम आने का दावा किया गया है। यदि आरोपों में संदर्भित पदों से जुड़े कार्यालय ही साक्ष्यों के संकलन, जाँच अधिकारी की नियुक्ति या अंतिम निष्कर्षों के पर्यवेक्षण में भूमिका निभाते हैं, तो जाँच की स्वतंत्रता को लेकर स्वाभाविक प्रश्न उठते हैं।
डिजिटल सबूत न्यूज़ का सवाल है: क्या शासन स्तर से किसी ऐसे स्वतंत्र अधिकारी या उपयुक्त जाँच एजेंसी के माध्यम से परीक्षण कराया जाएगा, जिसका कथित प्रकरण के संबंधित भुगतान या पदों से प्रत्यक्ष हित-संबंध न हो? किसके आदेश से जाँच होगी, मूल वीडियो व वित्तीय रिकॉर्ड कौन सुरक्षित रखेगा और किस समय-सीमा में जाँच आख्या सामने आएगी?
इस प्रकरण की जाँच केवल वीडियो के शब्दों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। संबंधित ग्राम पंचायत, योजना, कार्यादेश, बिल, वाउचर, स्वीकृति, वास्तविक बैंक भुगतान, अधिकारी के कार्यभार और सभी संबंधित व्यक्तियों के बयान का मिलान आवश्यक है। छह वर्षों की समस्त स्वीकृत धनराशि को किसी एक बीडीओ के कार्यकाल या कथित कमीशन का आधार घोषित करना उचित नहीं होगा।
डिजिटल सबूत न्यूज़ ने जाना विभागीय पक्ष; बीडीओ से संपर्क नहीं हो सका
इस मामले में डिजिटल सबूत न्यूज़ ने जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) से बातचीत की। समाचार कक्ष के अनुसार, प्रतिक्रिया माँगे जाने पर उन्होंने कहा—“मैं क्या बताऊँ, वीडियो तो वायरल है, सीडीओ साहब बताएँगे।” यह उनकी बातचीत में दी गई प्रतिक्रिया है, किसी औपचारिक जाँच आदेश या विभागीय निष्कर्ष का स्थानापन्न नहीं।
वहीं पटियाली के खंड विकास अधिकारी संजीव कुमार से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। इस प्रकरण से संबंधित किसी भी अधिकारी अथवा विभाग का पक्ष, स्पष्टीकरण या प्रासंगिक अभिलेख प्राप्त होने पर डिजिटल सबूत न्यूज़ उसका तथ्यात्मक परीक्षण कर उसे प्रमुखता से प्रकाशित करेगा। नए प्रमाणों से किसी तथ्य में संशोधन आवश्यक हुआ तो वह सुधार भी स्पष्ट रूप से प्रकाशित किया जाएगा।
संपादकीय स्पष्टता: डिजिटल सबूत न्यूज़ के पास उपलब्ध विकासखंडवार भुगतान-स्वीकृति अभिलेख, कथित वीडियो और संपादकीय संवाद-लिपि तीन अलग-अलग साक्ष्य स्रोत हैं। 10%, 4% और 5% के आधार पर प्रकाशित धनराशियों की गणना केवल काल्पनिक तुलना है; यह रिश्वत की वसूली, किसी अधिकारी की निजी आय या धन के वास्तविक वितरण का प्रमाण नहीं। वीडियो की मौलिकता, कथनों का संदर्भ, कथित वक्ता की पहचान और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का स्वतंत्र सत्यापन लंबित है।


