डिजिटल सबूत न्यूज़ | नई दिल्ली/चेन्नई, 19 अक्टूबर 2026। ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल के स्पीकर पर तेज आवाज में गाने, वीडियो या रील्स चलाकर दूसरे यात्रियों को परेशान करना अब महंगा पड़ सकता है। दक्षिण रेलवे के चेन्नई स्थित मुख्यालय ने 6 अक्टूबर 2026 को अपने छह मंडलों को पत्र भेजकर ऐसे मामलों में रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत कार्रवाई और यात्रियों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। पत्र के अनुसार, अन्य यात्रियों को असुविधा पहुंचाने वाले शोरगुल पर ₹1,000 जुर्माने का प्रावधान है। अधिकृत रेलकर्मी के मना करने के बावजूद व्यवधान जारी रखने पर छह माह तक साधारण कारावास या ₹5,000 तक जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।
दक्षिण रेलवे के पत्र में क्या लिखा है?
दक्षिण रेलवे की वाणिज्य शाखा का पत्र संख्या C.14/PA/PAS (E-Office 110056), दिनांक 06.10.2026, चेन्नई, पालक्काड, तिरुवनंतपुरम, तिरुचिरापल्ली, मदुरै और सलेम मंडलों के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधकों को संबोधित है। इसमें कहा गया है कि स्टेशन और ट्रेनों में स्पीकर पर संगीत और अन्य ऑडियो चलाने से सहयात्रियों के आराम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
पत्र में रेलवे बोर्ड के 23 जुलाई 2012 के पुराने निर्देश का भी हवाला है, जिसमें खासतौर पर वातानुकूलित डिब्बों में ऊंची आवाज में फोन पर बातचीत, लंबी कॉल और परेशान करने वाली रिंगटोन की समस्या का उल्लेख था। मोबाइल इंटरनेट के व्यापक इस्तेमाल के बाद अब स्पीकर पर वीडियो चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति को भी इस मुद्दे से जोड़ा गया है।
₹1,000 और ₹5,000 की कार्रवाई में क्या अंतर?
रेलवे अधिनियम, 1989 की संशोधित धारा 145(2) के अनुसार रेलवे के किसी डिब्बे या परिसर में उपद्रव करने, अशोभनीय आचरण या अपशब्दों का इस्तेमाल करने अथवा यात्रियों की आरामदायक यात्रा को प्रभावित करने पर संबंधित व्यक्ति को रेलवे से हटाने और उसका टिकट या पास जब्त होने के साथ ₹1,000 जुर्माने का प्रावधान है। यदि विधिसम्मत अधिकार रखने वाले रेलकर्मी द्वारा व्यवधान रोकने का निर्देश दिए जाने के बावजूद वह जारी रहता है, तो छह महीने तक साधारण कारावास, ₹5,000 तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान लागू हो सकता है।
स्पष्टीकरण: यह नहीं कहा जा सकता कि मोबाइल पर हर कॉल करने या कोई भी वीडियो देखने पर स्वतः जुर्माना लगेगा, अथवा पहली घटना पर छह महीने की जेल अनिवार्य है। कार्रवाई संबंधित व्यवहार से पैदा होने वाले व्यवधान और कानून में निर्धारित परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
स्टेशन और ट्रेनों में घोषणाएं होंगी, 20 अक्टूबर तक रिपोर्ट
परिपत्र में मंडलों को क्षेत्रीय भाषाओं के साथ हिंदी और अंग्रेजी में सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली से जागरूकता संदेश चलाने तथा नोटिस या स्टिकर प्रदर्शित करने को कहा गया है। यात्रियों को स्पीकर मोड पर गाने या वीडियो न चलाने, ऊंची आवाज में बातचीत से बचने और ईयरफोन का प्रयोग करने की सलाह देने के निर्देश हैं। पत्र के दूसरे पृष्ठ के मुताबिक, टिकट परीक्षक (Ticket Examiner) से कम पद के नहीं सक्षम वाणिज्य कर्मचारी नियमानुसार ₹1,000 का जुर्माना लगा सकते हैं। मंडलों से 20 अक्टूबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई है।
क्या नया कानून केवल दक्षिण रेलवे के लिए है?
नहीं। जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2026 द्वारा रेलवे अधिनियम में किए गए प्रासंगिक संशोधन पूरे भारतीय रेल अधिनियम से संबंधित हैं। रेल मंत्रालय की 19 जून 2026 की अधिसूचना S.O. 3255(E) से रेलवे अधिनियम संबंधी संशोधन प्रभावी हुए थे। हालांकि 6 अक्टूबर का यह विशिष्ट जागरूकता और अनुपालन परिपत्र दक्षिण रेलवे मुख्यालय ने अपने मंडलों को भेजा है। इसलिए इसे अक्टूबर में पूरे देश के लिए अलग से घोषित नया प्रतिबंध बताना सटीक नहीं होगा।
रेलवे यात्रियों के लिए व्यावहारिक संदेश साफ है: सफर के दौरान फोन पर वीडियो या गाना सुनना हो तो ईयरफोन का प्रयोग करें और अपनी बातचीत की आवाज इतनी रखें कि दूसरे यात्रियों को परेशानी न हो।
दस्तावेज़ और तथ्य-जाँच के स्रोत
1. दक्षिण रेलवे, वाणिज्य शाखा, पत्र C.14/PA/PAS, 06.10.2026: उपलब्ध दस्तावेज़ की प्रति और विवरण।
2. रेल मंत्रालय, राजपत्र अधिसूचना S.O. 3255(E), 19.06.2026: राजपत्र रिकॉर्ड।
3. संशोधित धारा 145 का पाठ दक्षिण रेलवे पत्र के साथ संलग्न जन विश्वास अधिनियम, 2026 के राजपत्र अंश में भी प्रकाशित है।


