डिजिटल सबूत | विशेष फीचर
कुछ यात्राएं रास्तों से नहीं, भरोसे से तय होती हैं। दृष्टिबाधित गायक सुनील लोधी की कहानी भी ऐसी ही है। आंखों से दुनिया को न देख पाने के बावजूद उन्होंने अपनी आवाज, बुंदेली लोकधुन और हनुमान भक्ति के जरिए ऐसी पहचान बनाई कि आज उनका गीत ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ फिल्म ‘हनुमान अंश’ के ओरिजिनल साउंडट्रैक का हिस्सा है। यह कहानी केवल एक गायक के वायरल होने की नहीं, बल्कि उस विश्वास की है जो साधारण परिस्थितियों से उठकर बड़े मंच तक पहुंच सकता है।
तंबूरे, लोकधुन और भक्ति से शुरू हुई पहचान
सुनील लोधी बुंदेली लोक और भक्ति संगीत से जुड़े गायक हैं। उनकी गायकी की सबसे बड़ी पहचान उसकी सादगी है—भारी तकनीकी तामझाम से ज्यादा आवाज, तंबूरा और लोकधुन। जनवरी 2026 में उनका हनुमान भजन ‘मोरे संकट के कटैया’ सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चित हुआ। इस प्रस्तुति में हनुमान जी से संकट हरने की प्रार्थना और बुंदेलखंड की लोकभाषा का सीधा भाव लोगों को पसंद आया।
संगीत प्लेटफॉर्म Shazam के अनुसार ‘More Sankat Ke Kataiya’ 11 नवंबर 2025 को रिलीज हुआ और इसमें Suneel Lodhi तथा Pankaj VRK को परफॉर्मर के रूप में श्रेय दिया गया है। इससे पहले और बाद में सुनील के नाम से कई भक्ति और बुंदेली गीत डिजिटल संगीत प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध हुए, जिससे उनकी आवाज धीरे-धीरे क्षेत्रीय दायरे से बाहर पहुंची।
‘मैंने तेरे ही भरोसे’—भक्ति का वही भाव, लेकिन मंच बड़ा
2026 में सुनील की आवाज ने एक और बड़ा पड़ाव पार किया। फिल्म ‘हनुमान अंश’ के ओरिजिनल मोशन पिक्चर साउंडट्रैक में उनका 2 मिनट 56 सेकंड का गीत ‘Maine Tere Hi Bharose’ शामिल हुआ। Amazon Music पर यह ट्रैक Suneel Lodhi के नाम से सूचीबद्ध है और 11 जुलाई 2026 की रिलीज के रूप में दर्ज है।
गीत का मूल भाव पूर्ण समर्पण का है—जीवन की नैया को हनुमान के भरोसे छोड़ देना। इसी भाव ने सुनील की अपनी यात्रा को भी प्रतीकात्मक अर्थ दे दिया है। सार्वजनिक प्रोफाइलों और मीडिया रिपोर्टों में उन्हें दृष्टिबाधित गायक के रूप में वर्णित किया गया है, जो बुंदेली लोकसंगीत और भक्ति गायन से आगे बढ़ते हुए फिल्मी साउंडट्रैक तक पहुंचे।
वायरल भजन से मुंबई रिकॉर्डिंग तक
हाल की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ‘मोरे संकट के कटैया’ के ऑनलाइन फैलने के बाद सुनील से संगीत जगत के लोगों ने संपर्क किया। Hindustan Times से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस पहचान के बाद उन्हें मुंबई बुलाया गया और स्टूडियो रिकॉर्डिंग का अवसर मिला। बाद में उन्हें पता चला कि उनकी रिकॉर्ड की गई आवाज फिल्म ‘हनुमान अंश’ में इस्तेमाल हुई है।
यही वह मोड़ है जो सुनील की कहानी को खास बनाता है। गांव और लोकपरंपरा से निकली आवाज पहले सोशल मीडिया तक पहुंची, फिर संगीत प्लेटफॉर्म पर जगह बनाई और अंततः फिल्मी साउंडट्रैक का हिस्सा बन गई।
दृष्टि नहीं, लेकिन दिशा साफ
सुनील लोधी की कहानी को केवल ‘दृष्टिबाधित गायक की सफलता’ कह देना शायद पूरा चित्र नहीं होगा। उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि लोककला, भक्ति और डिजिटल प्लेटफॉर्म मिलकर किसी ऐसी प्रतिभा को राष्ट्रीय पहचान दे सकते हैं जिसे पारंपरिक मनोरंजन उद्योग शायद लंबे समय तक न देख पाए।
उन्होंने दुनिया को अपनी आंखों से नहीं देखा, लेकिन अपनी आवाज से लोगों को यह जरूर दिखाया कि आस्था और अभ्यास किसी व्यक्ति को कितनी दूर तक ले जा सकते हैं। हनुमान भक्ति उनके गीतों में केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि उनकी संगीत पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आती है।
‘हनुमान अंश’ तक पहुंचना एक पड़ाव, अंत नहीं
फिल्म ‘हनुमान अंश’ को अगस्त 2026 में दर्शकों के बीच अप्रत्याशित सफलता मिली और इसके साथ साउंडट्रैक के कई गीत भी चर्चा में आए। सुनील का ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ इसी दौर में तेजी से लोगों तक पहुंचा। इससे पहले ‘मोरे संकट के कटैया’ ने जो पहचान बनाई थी, फिल्मी गीत ने उसे कहीं बड़े श्रोता वर्ग तक पहुंचा दिया।
सुनील की कहानी हमें यह याद दिलाती है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए हर बार आंखों से रास्ता देखना जरूरी नहीं होता—कभी-कभी भरोसा, साधना और आवाज ही रास्ता बना देते हैं। बुंदेलखंड के लोकस्वर से फिल्म ‘हनुमान अंश’ तक पहुंची यह यात्रा इसी विश्वास की कहानी है।
नोट: यह फीचर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध संगीत प्लेटफॉर्मों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। सुनील लोधी की निजी जीवन-कथा के जिन हिस्सों की स्वतंत्र प्राथमिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, उन्हें तथ्य के रूप में विस्तारित नहीं किया गया है।


