जौनपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में पांच सरकारी विद्यालयों के अस्तित्व को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दावा किया है कि पांच विद्यालय सरकारी U-DISE रिकॉर्ड में ‘Operational’ बताए जा रहे हैं, जबकि उनके अनुसार संबंधित स्थानों पर स्कूल भवन, शिक्षक और विद्यार्थी नहीं मिले।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार संजय सिंह ने जिन विद्यालयों का नाम लिया है, उनमें प्राथमिक विद्यालय ढालगर टोला, प्राथमिक विद्यालय मिसिरपुर कन्या, कंपोजिट विद्यालय गदन अर्जनी, प्राथमिक विद्यालय उर्दू बाजार और प्राथमिक विद्यालय बाग हासिम शामिल हैं। उन्होंने नगर शिक्षा अधिकारी के एक पत्र का हवाला देते हुए यह आरोप लगाया।
संजय सिंह का 24 अगस्त का X पोस्ट
24 अगस्त 2026 को अपने आधिकारिक X अकाउंट @SanjayAzadSln से संजय सिंह ने “स्कूल खोजो 1 लाख पाओ” लिखते हुए नगर शिक्षा अधिकारी, जौनपुर के 25 मई 2026 के एक पत्र का हवाला दिया। पोस्ट में उनके अनुसार पत्र में लिखा है कि “कुछ विद्यालयों का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि U-DISE में जिन पतों पर स्कूल ‘Operational’ दिखाए जा रहे हैं, वहां स्कूल खोजकर दिखाया जाए। यह X पोस्ट संजय सिंह का सार्वजनिक दावा है; संदर्भित मूल विभागीय पत्र और U-DISE प्रविष्टियों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है।
संजय सिंह ने चुनौती देते हुए कहा कि इन पांच विद्यालयों में से किसी एक को भी बताए गए स्थान पर खोजकर दिखाने वाले को वह अपनी तनख्वाह से ₹1 लाख देंगे।
दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक
यह मामला फिलहाल राजनीतिक आरोप और सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट किए गए दावों पर आधारित है। Digital Saboot News ने इस ड्राफ्ट में यह स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं किया है कि U-DISE की वर्तमान प्रविष्टियां क्या हैं, संबंधित पांचों स्थानों की वास्तविक स्थिति क्या है, अथवा शिक्षा विभाग की ओर से इन आरोपों पर क्या आधिकारिक जवाब दिया गया है। इसलिए ‘स्कूल गायब’ को स्थापित तथ्य के बजाय दावा माना गया है।
जांच के प्रमुख सवाल
मामले में यह सत्यापित किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विद्यालयों के U-DISE कोड और वर्तमान स्टेटस क्या हैं; विभागीय रिकॉर्ड में भवन/भूमि का स्वामित्व और स्थान क्या दर्ज है; छात्र एवं शिक्षक संख्या क्या दिखाई गई है; हाल के वर्षों में इन विद्यालयों के नाम पर कोई बजट, वेतन, मिड-डे मील, सामग्री या अन्य सरकारी व्यय दर्ज हुआ या नहीं; और नगर शिक्षा अधिकारी के संदर्भित पत्र में वास्तविक रूप से क्या निष्कर्ष दर्ज हैं।
शिक्षा विभाग अथवा जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे इसी रिपोर्ट में प्रमुखता से जोड़ा जाना चाहिए।
