नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। नई दिल्ली जिले के विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) ऋतु राज ने 19 अक्टूबर को जारी दो पृष्ठों के आदेश में हिरासत जारी रखने के कारणों के साथ दोनों की ओर से पेश जमानतदारों को स्वीकार न करने की वजहें भी दर्ज की हैं। डिजिटल सबूत न्यूज़ ने उपलब्ध आदेश की स्कैन प्रति का अध्ययन किया है।

पुलिस ने पाँच दिन की अतिरिक्त हिरासत माँगी थी
थाना संसद मार्ग के प्रभारी की ओर से दोनों की न्यायिक हिरासत पाँच दिन और बढ़ाने का आवेदन प्रस्तुत किया गया। आदेश के अनुसार, जाँच अधिकारी ने सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका जताते हुए कहा कि दोनों ने जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस जैसे प्रदर्शन के लिए अधिसूचित नहीं किए गए स्थानों पर लोगों को एकत्र होने के लिए बार-बार बुलाया। पुलिस ने एक अज्ञात व्हाट्सऐप संदेश, सोशल मीडिया पर किए गए कथित आह्वान और पहले दिए गए आश्वासनों का भी हवाला दिया। ये आरोप और आशंकाएँ पुलिस की ओर से न्यायालय के समक्ष रखी गई थीं।
बचाव पक्ष ने क्या कहा?
सौरव दास और आशुतोष रांका के वकील ने तत्काल रिहाई का अनुरोध किया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि हिरासत बढ़ाने के आवेदन में दोबारा ऐसा आचरण होने की कोई स्पष्ट आशंका नहीं बताई गई है। वकील का कहना था कि 10 अक्टूबर के बाद दोनों ने प्रदर्शन का कोई नया आह्वान नहीं किया और वे व्यक्तिगत रूप से जंतर-मंतर गए थे। बचाव पक्ष ने सह-संस्थापक अभिषेक दिप्के की रिहाई का भी उल्लेख किया।
SEM ने हिरासत जारी रखने का क्या आधार बताया?
आदेश में मजिस्ट्रेट ने दर्ज किया कि उपलब्ध सामग्री और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर उन्हें 11 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत शांति बनाए रखने संबंधी बॉन्ड की शर्तों का जानबूझकर उल्लंघन हुआ प्रतीत होता है। उन्होंने सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका और पूर्व आचरण को ध्यान में रखते हुए तत्काल रिहाई के पक्ष में दिए गए आश्वासन को पर्याप्त नहीं माना। यह आदेश के भीतर दर्ज मजिस्ट्रेट का निष्कर्ष है, किसी आपराधिक मुकदमे में दोषसिद्धि नहीं।
दोनों जमानतदारों को क्यों खारिज किया गया?
आदेश के दूसरे पृष्ठ के अनुसार, एक जमानतदार के बॉन्ड पर लगी तस्वीर और आधार कार्ड में उपलब्ध तस्वीर में अंतर पाया गया। जाँच के दौरान वह दूसरा वैध पहचान-पत्र प्रस्तुत नहीं कर सका और उसके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।
दूसरे जमानतदार से सौरव दास के बारे में बुनियादी विवरण, जैसे अभिभावकों के नाम और पता, पूछा गया। आदेश के अनुसार, वह यह जानकारी भी नहीं दे सका। मजिस्ट्रेट ने माना कि दोनों जमानतदार जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों को न्यायालय के समक्ष उपस्थित कराने का पर्याप्त भरोसा नहीं दिला सके। इसलिए दोनों को अनुपयुक्त मानते हुए नए जमानतदार प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
21 अक्टूबर को दोपहर दो बजे अगली पेशी
SEM ने दोनों को लिखित जवाब और समर्थन में दस्तावेज़ पेश करने के लिए दो दिन का समय दिया। इसकी अग्रिम प्रति जाँच अधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया। इस बीच दोनों की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर 2026 तक जारी रखने और उन्हें उस दिन दोपहर 2 बजे पेश करने का आदेश दिया गया।
दस्तावेज़ संबंधी स्पष्टता: यह रिपोर्ट 19 अक्टूबर 2026 के हस्ताक्षरित आदेश की उपलब्ध दो-पृष्ठीय स्कैन प्रति पर आधारित है। इसे न्यायालय द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रमाणित प्रति बताने का दावा नहीं किया जा रहा है। आदेश में दर्ज पुलिस के कथन, बचाव पक्ष की दलीलें और मजिस्ट्रेट के निष्कर्ष अलग-अलग प्रस्तुत किए गए हैं।
मूल दस्तावेज़: SEM का 19 अक्टूबर 2026 का पूरा आदेश (दो पृष्ठ, PDF)

