डिजिटल सबूत न्यूज़ डेस्क। गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली को लेकर एक यात्री के दावे ने सवाल खड़े किए हैं। डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने 26 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि लहरावन/बहजोई की ओर से लखनऊ की यात्रा के दौरान गंगा एक्सप्रेसवे पर किलोमीटर 123 से किलोमीटर 378 तक लगभग 255 किलोमीटर की दूरी तय करने पर कुल ₹835 टोल दो हिस्सों में काटा गया।
क्या है डॉ. शर्मा का दावा?
डॉ. शर्मा के सार्वजनिक X पोस्ट के अनुसार, लहरावन से करनपुर तक ₹55 और इसके बाद करनपुर से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की ओर आगे की यात्रा के लिए दूसरी टोल राशि काटे जाने का दावा किया गया है। उन्होंने इस मुद्दे को #GangaExpresswayTollTaxScam हैशटैग के साथ उठाया। मूल पोस्ट में उपलब्ध विवरण को डिजिटल सबूत न्यूज़ ने स्रोत के रूप में सुरक्षित रखा है, लेकिन संबंधित FASTag स्टेटमेंट, टोल रसीद और टोल ऑपरेटर का लेनदेन रिकॉर्ड स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है। इसलिए ₹835 की कटौती को इस समाचार में आरोप/दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।
255 किमी और ₹835: गणना क्या कहती है?
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रकाशित रिपोर्टों में कार/जीप/वैन/LMV के लिए गंगा एक्सप्रेसवे की आधार दर ₹2.55 प्रति किलोमीटर बताई गई है। केवल 255 किमी को ₹2.55 से गुणा करने पर राशि लगभग ₹650.25 बनती है। इस साधारण तुलना में दावा की गई ₹835 की कुल कटौती लगभग ₹184.75 अधिक दिखाई देती है। हालांकि यह अंतर अपने-आप किसी अनियमितता को साबित नहीं करता, क्योंकि वास्तविक शुल्क पैकेज/खंड, प्रवेश-निकास बिंदु, वाहन श्रेणी, लागू छूट और यात्रा में किसी दूसरे एक्सप्रेसवे का शुल्क शामिल होने पर बदल सकता है।
पूरे गंगा एक्सप्रेसवे का टोल ₹1,800
मई 2026 में टोल लागू होने के समय प्रकाशित पैकेज-वार जानकारी के अनुसार लगभग 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर कार/जीप/वैन से पूरी एकतरफा यात्रा का कुल शुल्क ₹1,800 बताया गया था। टोल वसूली 15 मई 2026 से लागू होने की रिपोर्टें प्रकाशित हुई थीं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि केवल एक समान प्रति-किलोमीटर गुणा के बजाय वास्तविक देय राशि को संबंधित यात्रा खंड और लागू टोल चार्ट के साथ मिलाना आवश्यक है।
बहजोई/चंदौसी खंड के लिए पहले भी जारी हुई थीं दरें
मई 2026 में प्रकाशित खंडवार दरों में चंदौसी/बहजोई (किमी 123) से मेरठ की ओर कार/जीप/वैन के लिए ₹400 का आंकड़ा रिपोर्ट किया गया था। यह बताता है कि एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग प्रवेश और निकास बिंदुओं के अनुसार शुल्क तालिका लागू होती है। इसलिए डॉ. शर्मा के मामले में निर्णायक जांच के लिए वास्तविक entry point, exit point, FASTag transaction ID और दोनों deductions का toll-plaza/package mapping जरूरी है।
इन पांच सवालों का जवाब जरूरी
पहला, किलोमीटर 123 से 378 तक संबंधित वाहन के लिए अधिकृत टोल चार्ट में वास्तविक शुल्क कितना है? दूसरा, ₹835 किन दो transaction IDs/खंडों में काटा गया? तीसरा, क्या इसमें गंगा एक्सप्रेसवे के अलावा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे या किसी connector/अन्य tolled section का शुल्क भी शामिल था? चौथा, FASTag backend में वाहन की श्रेणी क्या दर्ज हुई? पांचवां, यदि अतिरिक्त कटौती हुई तो refund/dispute की प्रक्रिया क्या होगी?
UPEIDA/टोल ऑपरेटर का पक्ष अभी अपेक्षित
डिजिटल सबूत न्यूज़ के पास फिलहाल UPEIDA अथवा संबंधित टोल ऑपरेटर का इस विशिष्ट ₹835 लेनदेन पर आधिकारिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है। संबंधित प्राधिकरण का पक्ष मिलने पर उसे इसी समाचार में प्रमुखता से जोड़ा जाएगा। बिना FASTag transaction record और अधिकृत point-to-point toll chart के किसी कथित घोटाले या गलत वसूली का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
संपादकीय सत्यापन नोट: मूल शिकायत/दावा डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के 26 अगस्त 2026 के सार्वजनिक X पोस्ट पर आधारित है। गंगा एक्सप्रेसवे की लंबाई और 2026 में लागू टोल व्यवस्था से संबंधित पृष्ठभूमि को सार्वजनिक/आधिकारिक तथा प्रतिष्ठित प्रकाशित स्रोतों से cross-check किया गया है। व्यक्तिगत ₹835 FASTag transaction की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
