कानपुर, 18 अक्टूबर 2026। होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण में अभ्यर्थियों से रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार दो चिकित्सकों को शनिवार देर रात जेल भेज दिया गया। उर्सला अस्पताल में भर्ती रहे डॉ. प्रवीण कुमार सक्सेना और डॉ. महेश कुमार द्विवेदी को बाद में क्रमशः कार्डियोलॉजी संस्थान और हैलट अस्पताल में परीक्षण के बाद जेल भेजे जाने के लिए चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त पाया गया। इस बीच, आरोपियों को पहले अस्पताल में भर्ती किए जाने की परिस्थितियों पर भी सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड से जांच के निर्देश दिए हैं।
15 अक्टूबर को पुलिस लाइन में कैसे शुरू हुआ विवाद?
कानपुर पुलिस लाइन में 15 अक्टूबर को होमगार्ड अभ्यर्थियों का मेडिकल परीक्षण चल रहा था। पहले दिन लगभग 200 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि नाक, आंख और अन्य शारीरिक कमियां बताकर उन्हें मेडिकल में अयोग्य घोषित करने की चेतावनी दी जा रही थी। आरोप है कि फिट घोषित करने के बदले 50 हजार रुपये तक की मांग की गई। शिकायत के बाद अभ्यर्थियों ने विरोध किया और पुलिस लाइन में हंगामा हुआ।
पर्ची पर मोबाइल नंबर और कार से रुपये लेने के आरोप
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों को मोबाइल नंबर लिखी पर्चियां दी गईं और पास खड़ी एक कार की ओर भेजा गया। कुछ अभ्यर्थियों से यूपीआई के जरिए 20 से 30 हजार रुपये लेने के आरोप भी सामने आए। जिला होमगार्ड कमांडेंट प्रीति शर्मा के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया कि एक अभ्यर्थी से मिली पर्ची और उस पर दर्ज नंबर के आधार पर मामले की पड़ताल शुरू हुई। आरोपित भुगतान की वास्तविक राशि, पैसा प्राप्त करने वालों की भूमिका और संभावित अन्य संलिप्तता पुलिस की जांच का विषय हैं।
दो डॉक्टरों और चालक की गिरफ्तारी, न्यायिक कार्रवाई अलग-अलग
प्रकरण में कोतवाली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर डॉ. प्रवीण कुमार सक्सेना, डॉ. महेश कुमार द्विवेदी और चालक अजीत कुमार को गिरफ्तार किया। अदालत ने दोनों डॉक्टरों का न्यायिक रिमांड स्वीकार किया। हालांकि, चालक अजीत का न्यायिक रिमांड स्वीकार नहीं किया गया और उसे मुचलके पर छोड़े जाने की जानकारी है। इसलिए तीनों को जेल भेजे जाने का दावा सही नहीं है। न्यायिक रिमांड अस्वीकार होने का अर्थ आरोपों से अंतिम दोषमुक्ति भी नहीं है।
उर्सला में भर्ती, फिर हैलट और कार्डियोलॉजी में दोबारा परीक्षण
गिरफ्तारी के बाद जेल भेजने से पहले पुलिस आरोपियों को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए उर्सला अस्पताल ले गई थी। वहां स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों के आधार पर दोनों डॉक्टरों को भर्ती किया गया। बाद में डॉ. प्रवीण कुमार को हृदय संबंधी समस्या बताते हुए कार्डियोलॉजी संस्थान और डॉ. महेश द्विवेदी को रीढ़ की समस्या के आधार पर हैलट अस्पताल भेजा गया। एसीपी कोतवाली अमित पांडेय के हवाले से प्रकाशित समाचार के अनुसार, दोनों संस्थानों में प्राथमिक परीक्षण के बाद उन्हें जेल भेजने के लिए फिट पाया गया और शनिवार रात जेल भेज दिया गया। इस निष्कर्ष से उनकी पूर्व चिकित्सकीय शिकायत झूठी सिद्ध नहीं होती।
अदालत ने मेडिकल बोर्ड से परीक्षण कराने को कहा
लाइव हिन्दुस्तान और अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने उर्सला में आरोपियों को तत्काल भर्ती किए जाने की परिस्थितियों को गंभीरता से लिया। रिपोर्टों में विशेषज्ञ पैनल से परीक्षण कराने, आदेश की प्रतियां संबंधित वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को भेजने तथा उर्सला के डॉ. सपन गुप्ता को नोटिस दिए जाने का उल्लेख है। हालांकि, अदालत का मूल आदेश और संबंधित चिकित्सकीय अभिलेख इस समाचार के लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं हो सके हैं। ऐसे में प्रथम मेडिकल रिपोर्ट को फर्जी या संबंधित चिकित्सकों को दोषी बताना उचित नहीं होगा।
पहले दिन का मेडिकल परीक्षण निरस्त, दोबारा होगा
जिला होमगार्ड कमांडेंट प्रीति शर्मा के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, विवाद के बाद 15 अक्टूबर को हुए पहले दिन के मेडिकल परीक्षण को निरस्त कर दोबारा कराने का निर्णय लिया गया। भर्ती प्रक्रिया के दौरान सामने आए आरोपों ने अभ्यर्थियों की निष्पक्ष जांच, कथित भुगतान के रिकॉर्ड और मेडिकल पैनल की जवाबदेही से जुड़े प्रश्न खड़े किए हैं। आपराधिक आरोपों की सच्चाई पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।



